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Dil ki udaan
दिल की उड़ान चाहत सी जगी है आज दिल में कई वर्षों के बाद ,
ख्वाहिश हुई है………हो जाने की आज़ाद ……
तोड़ के सारे बन्धन ,ये बंदिशें और दीवार ,
उड़ जाऊं मैं पंख लगा के नीले अम्बर के पार …..
चीर के निराशा के तिमिर को उड़ जाऊं वहाँ
आशा का सूरज न मद्धिम पड़ता हो जहाँ ……
दिलों कि रौशनी बन जाती हो जहाँ चांदनी,
छेड़ती हो हँसी वहाँ सुरों की रागनी …..
ग़मों के बादल जहाँ आंखों से नहीं बरसते ,
अपनों से मिलने को वहाँ अपने नहीं तरसते ..
प्यार और इंसानियत हो जहाँ सबसे बड़ी बंदगी.
मुस्कुराती हो हरपल वहाँ मासूम सी जिंदगी …।
जागी आँखों का सपना नहीं यह मेरे दिल की उडान है ,
मंजिल है दूर माना और रास्ता कठिन है वीरान है …
हो सकता है उड़ते उड़ते साँसों की डोरी तन जाये ,.
या फिर कौन जाने शायद मुझे मेरा क्षितिज मिल जाये
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