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Aur manavata gart mein giri jaa rahi hai
एवरेस्ट की चोटी तक झंडे गाड़े जा चुके हैं सागर की गहराई को भी मापे जा रहे हैं सभ्यता कहने को तो विकसित हुई जा रही है पर मानवता गर्त में गिरी जा रही है
जुटायें हैं साजो सामान कुबेर के खजाने से बातें हो जाती हैं समंदर पार बटन दबाने से पर दिलों के बीच की दूरी बढ़ी जा रही है और मानवता गर्त में गिरी जा रही है
कहने को एकता और भाईचारे की बात करते हैं लेकिन हर बात पे एक दूजे पे शक करते हैं विश्वास की आखिरी डोर भी टूटी जा रही है और मानवता गर्त में गिरी जा रही है
देखें तो चारो तरफ एक मेला सा है क्यूँ मुश्किलों में घिरा हर कोई अकेला सा है दिलों की रौशनी यूँ हर पल मधिम हुई जा रही है और मानवता गर्त में गिरी जा रही है
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