आशा की टिमटिमाती लौ लिए
देख रही हूँ कब से रास्ता तेरा
ऐ खुदा मुझे जरा बता दे तू
किस जर्रे किस कण में है बसेरा तेरा
बसता है गर तू हर शख्श में
तो क्यूँ हर दिल में अँधेरा है
अपनों के खून का प्यासा हर कोई
क्यों अपनों की ही अस्मत का लुटेरा है
आँखों में खून सर पे जूनून
दिल में नफरत की एक आग है
जज्बातों की चिता पे बैठे
कर रहा हर रिश्तों को वो ख़ाक है
यह जिन्दा लाशें तो हो नही सकतीं
कभी भी मंदिर तेरा
तो सच बता दे मुझे तू आज
क्या बदल लिया है तूने बसेरा तेरा